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जर्जर दिल
जर्जर दिल जर्जर दिल मिला है ग़म तुम्हारी याद से, बरसात बाकी है, गिरेंगे आँख से कतरे, अभी शुरुआत बाकी है। मुहब्बत में करारी हार…
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फूलवाली
फूलवाली इस बार फूल वाली से प्यार कर बैठे, हम उनका प्रस्ताव स्वीकार कर बैठे। वह फूल बेच रहे थे मुस्कुराकर इसलिए, हम उनकी दुकान…
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खामोशी
खामोशी बड़ी मशक्कत के बाद खुद को सँवार कर बैठे हैं, हम अपने इस गम को दरकिनार कर बैठे हैं। महफिलों में नहीं दिखती होठों…
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कंकाल
कंकाल भीमसेन का पुत्र वीर विकराल बहुत, जिसकी माला में गूथे कंकाल बहुत। रूप भयावह धरे दनुज रण में उतरे, तंत्र मंत्र भ्रम माया है…
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नीलकंठ महादेव
नीलकंठ महादेव पुष्प से गिरे-गिरे हैं श्वेत हिम बिखर-बिखर, ढक गया है पर्वत मैं देखता जिधर-जिधर। अप्सराएं देवगण करें यहां भ्रमण-भ्रमण, नृत्य कर रहे हैं…
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पतझड़
माना अभी पतझड़ है, दिन बहार के भी आएंगे, उम्मीद की कलियाँ खिलेंगी, सब चेहरे मुस्काएंगे।
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श्रापित अहिल्या की पुकार
**श्रापित अहिल्या की करुण पुकार** पर आधारित यह भक्ति-रचना भुजंगप्रयात छंद में रचित है। इसमें अहिल्या की पीड़ा, पश्चाताप और श्रीराम से मुक्ति की याचना…
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राखी के दोहे और छंद – गुमनाम कवि एवं विजय पाल नाविक
राखी के दोहे – गुमनाम कवि और विजय पाल नाविक | Shabd Sahity राखी के दोहे और छंद राखी के बदले बहन, मत मांगो उपहार…
