जर्जर दिल

जर्जर दिल

जर्जर दिल

मिला है ग़म तुम्हारी याद से, बरसात बाकी है,
गिरेंगे आँख से कतरे, अभी शुरुआत बाकी है।
मुहब्बत में करारी हार का, मातम मनाने दो,
हुआ जर्जर हमारा दिल, अभी तो रात बाकी है।।
चुभन है इश्क में ज़ख्म-ए-अलम, उभरा हुआ है दिल,
किसी ख़ामोश दरिया की तरह, गहरा हुआ है दिल।
कभी डुबो तभी जानो, छिपा आतिशफ़िशाँ दिल में,
किसी टूटे नगीने की तरह, बिखरा हुआ है दिल।।
निगाहें प्यास से बेचैन, तिरा दीद गायब है,
यहाँ सब लोग खुश लेकिन, हमारी ईद गायब है।
तिरे रुख़सार के गड्ढे, तवज्जो छीन लेते हैं,
हमारी भूख गायब है, हमारी नींद गायब है।।
सजे इस आसमाँ का एक, टूटा हूँ सितारा मैं,
किसी बहते हुए दरिया का, सूना सा किनारा मैं।
अँधेरे से हमारी हो गई है, हमनवायत यह,
नज़र में आ नहीं सकता, कि ऐसा हूँ नज़ारा मैं।।
— गुमनाम कवि

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