Category: कविता

  • कंकाल

    कंकाल भीमसेन का पुत्र वीर विकराल बहुत, जिसकी माला में गूथे कंकाल बहुत। रूप भयावह धरे दनुज रण में उतरे, तंत्र मंत्र भ्रम माया है…

    Read More