Month: May 2026

  • जर्जर दिल

    जर्जर दिल जर्जर दिल मिला है ग़म तुम्हारी याद से, बरसात बाकी है, गिरेंगे आँख से कतरे, अभी शुरुआत बाकी है। मुहब्बत में करारी हार…

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  • फूलवाली

    फूलवाली इस बार फूल वाली से प्यार कर बैठे, हम उनका प्रस्ताव स्वीकार कर बैठे। वह फूल बेच रहे थे मुस्कुराकर इसलिए, हम उनकी दुकान…

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  • खामोशी

    खामोशी बड़ी मशक्कत के बाद खुद को सँवार कर बैठे हैं, हम अपने इस गम को दरकिनार कर बैठे हैं। महफिलों में नहीं दिखती होठों…

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  • कंकाल

    कंकाल भीमसेन का पुत्र वीर विकराल बहुत, जिसकी माला में गूथे कंकाल बहुत। रूप भयावह धरे दनुज रण में उतरे, तंत्र मंत्र भ्रम माया है…

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  • नीलकंठ महादेव

    नीलकंठ महादेव पुष्प से गिरे-गिरे हैं श्वेत हिम बिखर-बिखर, ढक गया है पर्वत मैं देखता जिधर-जिधर। अप्सराएं देवगण करें यहां भ्रमण-भ्रमण, नृत्य कर रहे हैं…

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  • पतझड़

    माना अभी पतझड़ है, दिन बहार के भी आएंगे, उम्मीद की कलियाँ खिलेंगी, सब चेहरे मुस्काएंगे।

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  • श्रापित अहिल्या की पुकार

    **श्रापित अहिल्या की करुण पुकार** पर आधारित यह भक्ति-रचना भुजंगप्रयात छंद में रचित है। इसमें अहिल्या की पीड़ा, पश्चाताप और श्रीराम से मुक्ति की याचना…

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  • राखी के दोहे और छंद – गुमनाम कवि एवं विजय पाल नाविक

    राखी के दोहे – गुमनाम कवि और विजय पाल नाविक | Shabd Sahity राखी के दोहे और छंद राखी के बदले बहन, मत मांगो उपहार…

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