फूलवाली
इस बार फूल वाली से प्यार कर बैठे, हम उनका प्रस्ताव स्वीकार कर बैठे। वह फूल बेच रहे थे मुस्कुराकर इसलिए, हम उनकी दुकान में उधार कर बैठे।। देखा गया हर एक ख्वाब रंगीन होना चाहिए, जिस बाग में हम रहे बेहतरीन होना चाहिए। माना भँवरे का हर फूल पर मंडराना गुनाह है, पर तुम्हें अपनी भँवरे पर यकीन होना चाहिए।। फूलों के बिना सावन कैसे हो सकता है, यहां हर फूल पावन कैसे हो सकता है। भंवरा पी जाता है हर फूल से मीठा रस, दृश्य इतना मनभावन कैसे हो सकता है।। मैं जो पढ़ना चाहूं वह किताब तुम हो, मैं जो देखना चाहूं वह ख्वाब तुम हो। बाग भरा हुआ है रंग बिरंगे फूलों से, मुझे जो फूल चाहिए वह गुलाब तुम हो।।
— गुमनाम कवि
भावार्थ
इस कविता में कवि एक फूल बेचने वाली युवती के प्रति अपने प्रेम को सरल और मधुर शब्दों में व्यक्त करता है। वह कहता है कि इस बार वह फूलवाली से प्रेम कर बैठा और उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। फूलवाली की मुस्कान और उसके व्यवहार ने कवि को इतना आकर्षित किया कि वह बार-बार उसकी दुकान की ओर खिंचता चला गया।
कवि आगे कहता है कि हर सपना रंगीन और सुंदर होना चाहिए तथा जिस बाग में प्रेम बसे वह बेहतरीन होना चाहिए। वह भँवरे और फूल का उदाहरण देकर कहता है कि भले ही भँवरे का हर फूल पर मंडराना गलत समझा जाए, लेकिन प्रेम में विश्वास सबसे जरूरी है। यदि विश्वास हो तो हर रिश्ता सुंदर बन सकता है।
तीसरे पद में कवि फूलों और सावन के संबंध को बताता है। वह कहता है कि फूलों के बिना सावन अधूरा है। भँवरा जब फूलों से मीठा रस पीता है तो वह दृश्य अत्यंत मनभावन और आकर्षक लगता है। कवि इसी प्राकृतिक सौंदर्य के माध्यम से प्रेम की मिठास और सुंदरता को दर्शाता है।
अंतिम पद में कवि अपने प्रेम को और गहराई से प्रकट करता है। वह कहता है कि जिसे वह पढ़ना चाहता है वह किताब भी वही है, और जिसे वह देखना चाहता है वह सपना भी वही है। बाग में अनेक रंग-बिरंगे फूल होते हैं, लेकिन कवि को जो फूल सबसे प्रिय है वह गुलाब है, और वह गुलाब उसके लिए वही फूलवाली है। यह प्रेम की सच्चाई और एकनिष्ठता को दर्शाता है।

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